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कर्ज माफी योजना : सहकारी बैंक के बाद अब कमर्शियल बैंकों से लिया ऋण होगा माफ

कर्ज माफी योजना : सहकारी बैंक के बाद अब कमर्शियल बैंकों से लिया ऋण होगा माफ


राजस्थान की गहलोत सरकार की ओर से राज्य के किसानों के कर्ज माफ करने की प्रक्रिया जारी है। सहकारी बैंकों के बाद अब गहलोत सरकार कर्मिशियल बैंकों के कर्ज माफ करने की तैयारी में जुट गई है। इसको लेकर कर्मिशियल बैंकों ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ऐसे किसानों को 

कर्ज माफी का लाभ देने के लिए सरकार द्वारा योजना अमल में लाई जाएगी। इससे प्रदेश के उन किसानों को फायदा होगा जिन्होंने कर्मिशियल बैंक से ऋण लिया है। हालांकि अभी राज्य सरकार की ओर से कर्मिशियल बैंकों के ऋण माफी को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है लेकिन ऐसी उम्मीद की जा रही है कि राज्य कृषि बजट का इस्तेमाल कर ऐसे किसानों का बकाया कर्ज माफ कर सकती है।


बता दें कि इससे पहले सीएम गहलोत ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को ऑफर दिया था कि एनपीए हो चुके लोन का 10 प्रतिशत सरकार चुकाएगी, 90 प्रतिशत बैंक माफ करेंगे। लेकिन बैंकों ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। इसलिए सरकार अब अपने स्तर पर कमर्शियल बैंकों की कर्जमाफी की कवायद में जुटी है। बता दें कि गहलोत सरकार ने सत्ता में आने से पहले किसानों के बकाया कर्ज माफ करने की घोषणा की थी जो अब पूरी होती दिखाई दे रही है। इससे प्रदेश के लाखों किसानों को राहत मिलेगी।


ऐसे किया जाएगा किसानों का बकाया कर्ज माफ (Debt Waiver Scheme)

बता दें कि राज्य की गहलोत सरकार ने कर्मिशियल बैंकों से ऐसे किसानों की रिपोर्ट देने को कहा था जिनका बैंक ऋण काफी समय से बकाया है और इनकी जमीन कुर्क करने की कार्रवाई की जा रही थी। ऐसे में राज्य सरकार ने बैंकों से ऐसे किसानों का कर्ज माफ करने को कहा था। सरकार ने कहा कि एसबीआई बैंक की तरह ही कर्मिशियल बैंक भी किसानों के कर्ज माफ करें। इसमें 90 प्रतिशत कर्ज बैंक माफ करें और 10 प्रतिशत कर्ज सरकार चुकाएगी। लेकिन कमर्शियल बैंकों ने किसानों के कर्ज माफ करने को लेकर कोई रूचि नहीं ली। जिसके बाद अब सरकार स्वयं किसानों के बकाया कर्ज माफ करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार कृषि बजट का इस्तेमाल कर सकती है।


राजस्थान के इतिहास में पहली बार हो रही हैं दो बातें

राजस्थान के इतिहास में पहली बार दो बातें होने जा रही हैं। पहली बात तो यह है कि अब राज्य में कृषि के लिए अलग से बजट पेश किया जाएगा। और दूसरी बात किसानों की कर्जमाफी करना। बता दें कि गहलोत सरकार की ओर से किसानों के सहकारी बैंक से लिए गए ऋण पहले ही माफ किए जा चुके है और अब कर्मिशियल बैंकों के कर्ज माफ किए जाने शेष हैं। ऐसे में कमर्शियल बैंक ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही किसानों की ऋण माफी को लेकर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।


कमर्शियल बैंकों की रिपोर्ट में क्या है?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार की तरफ से बैंकों से कोऑर्डिनेट करने वाले आयोजना विभाग ने कमर्शियल बैंकों के कर्जदार किसानों की मौजूदा स्थिति की स्टेटस रिपोर्ट वित्त विभाग को सौंप दी है। यह कर्जमाफी करीब 2.5 हजार करोड़ रुपए तक की हो सकती है। बता दें कि इस बार कृषि बजट अलग से पेश करने की घोषणा पिछले बजट में की गई थी।



अब कुर्क नहीं होगी किसानों की जमीन

बता दें पिछले दिनों कमर्शियल बैंकों की ओर से प्रदेश के ऋणी किसानों की जमीन कुर्क करने के मामले सामने आए थे। इस पर राज्य सरकार को इन बैंकों के अधिकारियों को आदेश जारी करने पड़े थे कि किसानों की जमीन नीलाम करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाए। इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर राजस्व विभाग ने सभी जिलों से जमीन कुर्की के प्रकरणों की रिपोर्ट तलब की। इसमें 1 लाख 11 हजार 727 किसानों के खिलाफ जमीन कुर्की की कार्रवाई चल रही थी इनमें से 9 हजार को नोटिस भी दे दिए गए थे। इसके बाद वित्त विभाग के निर्देश पर आयोजना विभाग ने स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी से कर्जदार किसानों की रिपोर्ट ले ली।


3 लाख किसानों का 6 हजार करोड़ ऋण एनपीए घोषित

जानकारों के अनुसार करीब 3 लाख से अधिक किसानों का 6018 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण एनपीए है। इनमें से करीब 2.5 से 3 हजार करोड़ का लोन ही कुर्की के दायरे में है। इसलिए सिर्फ इसे माफ करवाने की कवायद है। हालांकि घोषणा को अंतिम रूप अभी नहीं मिला है। जैसा कि अगले साल 2023 में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होंगे। ऐसे में ये उम्मीद की जा रही है कि राज्य की गहलोत सरकार किसानों को अपने पक्ष में करने के लिए उनका पूरा कर्ज माफ कर सकती है।


क्या होता है एनपीए?

जब भी कोई बैंक का कर्जदार अपने बैंक की लोन किस्त देने में असमर्थ रहता है तो बैंक उस हालात में उसके अकाउंट को नॉन परफॉर्मिंग असेट्स यानी एनपीए में डाल देती है। इसका यह मतलब होता है कि बैंक का वह कर्जा डूब गया है या फिर उस कर्जे के वापस आने की उम्मीद नहीं के बराबर है। जैसा कि कोई भी बैंक आपको लोन देने के बाद आपको कम से कम 3 महीने का समय देता है अगर आप अपने पहले महीने में किस्त नहीं देते या फिर दूसरे और तीसरे महीने में भी अपनी किस्त देने में असमर्थ होते हैं। यानि आपने 90 दिन तक अपने बैंक की कोई भी किस्त नहीं दी होती है तो बैंक लोन एनपीए हो जाता है। इसे बेड लोन भी कहा जाता है।


किसानों का अब तक 14 हजार करोड़ रुपए का लोन किया माफ

राज्य की गहलोत सरकार ने अब तक 14 हजार करोड़ रुपए का सहकारी बैंकों से किसानों द्वारा लिया कर्ज माफ किया है। इस संबंध में स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की बैठक में राज्य सरकार ने बताया था कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद अब तक 14 हजार करोड़ का सहकारी बैंकों का कर्जमाफ हुआ है। पिछली भाजपा सरकार का भी इसमें 6 हजार करोड़ का कर्ज शामिल है। सरकार के अनुसार 30 नवंबर 2018 को एनपीए घोषित राष्ट्रीयकृत बैंकों के कृषक खातों के कर्जमाफ किए जाने शेष हैं

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